Pakistan News: पाकिस्तान की संसद ने न्यायपालिका के लिए विवादास्पद संविधान संशोधन विधेयक किया पारित
Pakistan News: पाकिस्तान की संसद ने न्यायपालिका के लिए विवादास्पद संविधान संशोधन विधेयक किया पारित
Published : Oct 21, 2024, 12:33 pm IST
Updated : Oct 21, 2024, 12:33 pm IST
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Pakistan passes constitutional amendment bill for judiciary News in Hindi
Pakistan passes constitutional amendment bill for judiciary News in Hindi

पाकिस्तान के समाचार आउटलेट डॉन के अनुसार, 336 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में मतदान के दौरान 225 सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया।

Pakistan Parliament passes controversial constitutional amendment bill for judiciary News In Hindi: पाकिस्तान की ‘नेशनल असेंबली’ ने रविवार रात भर चली बहस के बाद सोमवार को विवादास्पद 26वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। विधेयक में मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल तीन वर्ष तक सीमित करने का प्रावधान है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे न्यायिक प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी कदम बताया। 

पाकिस्तान के समाचार आउटलेट डॉन के अनुसार, 336 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में मतदान के दौरान 225 सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया। सरकार को संशोधन पारित करने के लिए 224 वोटों की आवश्यकता थी। सीनेट ने रविवार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के साथ संशोधन को मंजूरी देने के लिए 65-4 वोट दिए। सत्तारूढ़ गठबंधन को संसद के ऊपरी सदन में 64 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।

‘नेशनल असेंबली’ ने संशोधन विधेयक को सुबह पांच बजे पारित कर दिया। विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि इसका उद्देश्य स्वतंत्र न्यायपालिका की शक्तियों को कम करना है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और सुन्नी-इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) ने संशोधन विधेयक का विरोध किया, लेकिन पीटीआई के समर्थन से सीट जीतने वाले छह निर्दलीय सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया।

संसद के दोनों सदनों में विधेयक के पारित होने के बाद इसे अब पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद-75 के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।

इस विधेयक में सर्वोच्च न्यायालय के तीन वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से एक को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए एक विशेष आयोग का गठन करने समेत कई संवैधानिक संशोधन शामिल हैं।

सीनेट के इस सत्र में विधेयक पेश करते हुए कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने कहा कि ‘नए चेहरे’ वाले आयोग में मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश, दो सीनेटर और नेशनल असेंबली के दो सदस्य (एमएनए) शामिल होंगे। सीनेट और नेशनल असेंबली के दो-दो सदस्यों में से एक-एक विपक्षी दल से होगा।

इस संशोधन से अब वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने के बाद उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश के मुख्य न्यायाधीश के पद पर स्वतः पदोन्नति पर रोक लग गई है।

‘स्पीकर’ अयाज सादिक ने ‘नेशनल असेंबली’ में कार्यवाही की अध्यक्षता की।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जारी एक बयान के अनुसार, कैबिनेट बैठक से पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर विस्तृत चर्चा के लिए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात कर उन्हें जानकारी दी और उनसे परामर्श किया।

विधेयक पारित होने के बाद शहबाज ने संसद में कहा, ‘‘आज संविधान का यह 26वां संशोधन सिर्फ एक संशोधन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता और आम सहमति का एक उदाहरण है। एक नया सूरज उगेगा, जो पूरे देश में चमकेगा।’’

हालांकि, विपक्ष ने आरोप लगाया कि पूरी कवायद का उद्देश्य न्यायमूर्ति मंसूर अली शाह की नियुक्ति को रोकना है, ताकि 25 अक्टूबर को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा की सेवानिवृत्ति पर वे मुख्य न्यायाधीश नहीं बन सकें।

पीटीआई नेता हम्माद अजहर ने संशोधन को “न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर घातक प्रहार” करार दिया और बताया कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार सरकार को देने से न्यायपालिका का राजनीतिकरण होगा।

पीटीआई नेता अली जफर ने कहा कि उनकी पार्टी के सांसदों को इसके पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सांसद गैरमौजूद थे क्योंकि उन्हें डर था कि सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए जबरन उनपर दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने सीनेट के अध्यक्ष से पीटीआई के किसी भी सांसद के वोट की गिनती इसमें शामिल नहीं करने का आग्रह किया।

इस विधेयक को पारित कराने में व्यापक प्रयास करने वाले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी ने कहा कि सरकार इस संशोधन की दिशा में आगे बढ़ेगी, चाहे पीटीआई इसके पक्ष में मतदान करे या नहीं। बिलावल ने मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘हमने जितना हो सका उतना इंतजार किया और आज किसी भी हालात में यह काम पूरा हो जाएगा।’’

(For more news apart from Pakistan Parliament passes controversial constitutional amendment bill for judiciary News In Hindi, stay tuned to Spokesman Hindi)


 

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