Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; आधार को पहचान के लिए 12वां दस्तावेज माना जाए, नागरिकता का प्रमाण नहीं
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; आधार को पहचान के लिए 12वां दस्तावेज माना जाए, नागरिकता का प्रमाण नहीं
Published : Sep 8, 2025, 5:55 pm IST
Updated : Sep 8, 2025, 5:55 pm IST
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Aadhaar should be considered the 12th document for identification, not proof of citizenship news in hindi
Aadhaar should be considered the 12th document for identification, not proof of citizenship news in hindi

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले पर सुनवाई की।

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसमें आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की अनुमति दी गई है। अब आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इसका उपयोग किया जा सकेगा। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है और इसकी प्रामाणिकता की जांच की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह अपने अधिकारियों को निर्देश जारी करे कि आधार को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करें। अधिकारियों को यह अधिकार होगा कि वे आधार कार्ड की प्रामाणिकता और असली होने की जांच कर सकें।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरजेडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है, निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी और बीएलओ आधार कार्ड को एकमात्र दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सिब्बल ने उन मतदाताओं के शपथपत्र भी अदालत में प्रस्तुत किए जिनके आधार कार्ड को मान्यता नहीं दी गई। उन्होंने तर्क दिया कि आधार सबसे आम दस्तावेज है और अगर इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा तो यह गरीबों और वंचित वर्गों को मतदाता सूची से बाहर करने जैसा होगा। सिब्बल ने जोर देकर कहा कि आधार को शामिल न करना मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया को बाधित करेगा ¹।

चुनाव आयोग की ओर से राकेश द्विवेदी ने रखा पक्ष

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि आधार नागरिकता का सबूत नहीं है, लेकिन पहचान प्रमाण के रूप में इसे स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयोग ने इस बारे में विज्ञापन भी जारी किए हैं।

इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि आयोग की सूची में शामिल 11 दस्तावेजों में से केवल पासपोर्ट और जन्म प्रमाणपत्र ही नागरिकता का सबूत हैं, बाकी किसी से भी नागरिकता साबित नहीं होती।

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