Pariksha Pe Charcha 2026: शिक्षा बोझ नहीं हो, केवल अंकों पर नहीं बल्कि जीवन बेहतर बनाने पर ध्यान दें: प्रधानमंत्री मोदी
Pariksha Pe Charcha 2026:'शिक्षा बोझ नहीं हो, केवल अंकों पर नहीं बल्कि जीवन बेहतर बनाने पर ध्यान दें': प्रधानमंत्री मोदी
Published : Feb 6, 2026, 6:10 pm IST
Updated : Feb 6, 2026, 6:11 pm IST
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PM interacts with students during Pariksha Pe Charcha 2026
PM interacts with students during Pariksha Pe Charcha 2026

सभी की सलाह सुनें, लेकिन अपनी आदतों में तभी बदलाव करें जब आप चाहें: प्रधानमंत्री

Pariksha Pe Charcha 2026: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छात्रों को अपने जीवन एवं शैक्षणिक कौशल को निखारने पर ध्यान केंद्रित की सलाह देते हुए शुक्रवार को कहा कि देश में डेटा सस्ता होने का मतलब यह नहीं है कि वे इंटरनेट पर समय बर्बाद करें। (PM interacts with students during Pariksha Pe Charcha 2026 news in hindi) 

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के नौवें संस्करण में छात्रों से कहा कि शिक्षा बोझ नहीं होनी चाहिए और सभी को पूरी लगन से पढ़ना चाहिए क्योंकि आधे-अधूरे मन से की गई पढ़ाई जीवन को सफल नहीं बनाती।     

उन्होंने यहां अपने आवास पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों के एक समूह से कहा, ‘‘शिक्षा मजबूरी नहीं होनी चाहिए। शिक्षा बोझ नहीं होनी चाहिए। हमारी पूरी तल्लीनता चाहिए। अगर पूरी तरह तल्लीनता से पढ़ाई नहीं की है, तो फिर आधी-अधूरी शिक्षा, वह जीवन को कहीं सफल नहीं बनाने देती।’    

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मोदी ने बच्चों से कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच के भीतर हो लेकिन आसानी से प्राप्त होने वाला न हो। पहले मन को साधो, फिर मन को जोड़ो और फिर जिन विषयों की पढ़ाई करनी है, उन्हें सामने रखो। तब आप हमेशा सफल होंगे।’     

मोदी ने छात्रों को मनोरंजन के लिए गेम खेलने में समय बर्बाद नहीं करने की सलाह दी।   

उन्होंने कहा, ‘‘आपकी गेमिंग में रुचि है लेकिन भारत में डेटा सस्ता है तो सिर्फ समय काटने के लिए इसमें लिप्त मत होइए। इसे मनोरंजन के लिए मत करिए। जो लोग पैसे कमाने के लिए गेमिंग में लिप्त होते हैं, उनका ही नुकसान होता है। हमें देश में जुए को बढ़ावा नहीं देना है। मैंने ऑनलाइन जुए के खिलाफ कानून बनाया है।’’  

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गेमिंग एक कौशल है क्योंकि इसमें काफी गति होती है और इसका उपयोग सतर्कता परखने तथा आत्म-विकास के लिए किया जा सकता है।  

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी का कार्य करने का अपना तरीका या शैली होती है।     

उन्होंने कहा, ‘‘जो बीत गया, मैं उसे नहीं देखता। मैं हमेशा आगे आने वाली चीजों के बारे में सोचता हूं। कुछ शिक्षक होते हैं जो केवल महत्वपूर्ण चीजें पढ़ाते हैं और अच्छे अंक लाने में आपकी मदद कर सकते हैं, लेकिन अच्छे शिक्षक सर्वांगीण विकास के लिए पूरा पाठ्यक्रम पढ़वाते हैं। जीवन में केवल परीक्षा अहम नहीं है। शिक्षा हमारे विकास का माध्यम है।’’     

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उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री बन गया हूं। फिर भी, लोग मुझे अलग तरीकों से काम करने की सलाह देते हैं। लेकिन हर किसी की अपनी कार्य-शैली होती है। कुछ लोग सुबह बेहतर पढ़ते हैं, कुछ रात में। जो भी आपको सही लगे, उस पर विश्वास करें लेकिन सलाह भी लें और अगर उससे आपको फायदा हो, तो ही उसे अपनी जीवनशैली में शामिल करें।’’    

मोदी ने कहा, ‘‘जब मैंने परीक्षा पे चर्चा शुरू की, तब एक पैटर्न था। अब धीरे-धीरे मैं उसमें सुधार करता जा रहा हूं। लेकिन मूल पैटर्न को छोड़ा नहीं।’’   

उन्होंने कहा कि शिक्षक का प्रयास होना चाहिए कि उनकी गति छात्रों से एक कदम ही आगे हो, ज्यादा नहीं। 

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प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से अध्ययन, आराम, कौशल और रुचियों के बीच संतुलन बनाने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘कौशल भी दो प्रकार के हैं। एक है, जीवन का कौशल। दूसरा है, पेशेवर कौशल। उसमें भी कोई मुझे पूछेगा कि जीवन के कौशल में ध्यान देना चाहिए कि पेशेवर में? मैं कहूंगा दोनों में देना चाहिए।’’      

मोदी ने कहा,‘‘हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो, लेकिन पकड़ में ना हो। जीवन में हर चीज में एक संतुलन होना चाहिए। अगर आप एक तरफ अधिक झुकेंगे तो गिर जाएंगे।’’    

प्रधानमंत्री ने खुद से जुड़ी एक घटना याद करते हुए कहा कि उनके जन्मदिन पर एक नेता ने उन्हें फोन कर कहा था, ‘‘आप 75 साल के हो गए हैं, 25 वर्ष अभी बाकी हैं।’’     

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उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं अतीत के दिन नहीं गिनता। मैं जो बाकी है, उसे गिनता हूं। इसलिए मैं आपसे कहता हूं कि अतीत के बारे में नहीं सोचें। आपके सामने जो है, उसे जीने की कोशिश करें।’’    

साल 2018 में शुरू हुए ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में ‘टाऊनहॉल’ के प्रारूप में छात्रों से बातचीत होती थी और यह धीरे-धीरे भारत का सबसे बड़ा शिक्षा से संबंधित सहभागिता वाला कार्यक्रम बन गया।    

वर्ष 2023 में लगभग 38.8 लाख बच्चों ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया और यह 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.26 करोड़ हो गया। 2025 में यह आंकड़ा 3.53 करोड़ तक पहुंच गया और ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बन गया। वहीं, नौवें संस्करण ने 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया।  

इस वर्ष, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर विद्यार्थियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए गए।

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