ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने आई-पैक दफ्तर की छापेमारी में बाधा डाली और महत्वपूर्ण दस्तावेज हटाए लिए।
Mamata Banerjee Vs ED: आई-पैक (I-PAC) कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित रूप से बाधा डालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई एक महीने के लिए स्थगित कर दी है। इस याचिका पर अगली सुनवाई अब 18 मार्च को होगी। (Mamata Banerjee Accused Of Interfering In ED Raids news in hindi )
ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
पश्चिम बंगाल के एक पुलिस अधिकारी ने ईडी पर इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, जबकि ईडी के वकील ने कहा कि जांच एजेंसी को डराया गया है।
जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ईडी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। ईडी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि जांच के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ जांच स्थल पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली।
बुधवार को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारी के लिए पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने ईडी पर इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इस पर ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि ईडी को हथियार नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि उसे डराया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई होली के बाद के लिए स्थगित करते हुए 18 मार्च की नई तारीख निर्धारित की।
पिछले सप्ताह सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी। 8 जनवरी को आई-पैक कार्यालय पर हुई ईडी की छापेमारी का मुख्य उद्देश्य कोयला तस्करी से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हवाला लिंक की जांच करना था।
ईडी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है। एजेंसी का आरोप है कि तलाशी अभियान के दौरान उसके वैधानिक कर्तव्यों में बाधा डाली गई।
अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह 8 जनवरी 2026 को प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और बिधाननगर स्थित आई-पैक कार्यालय इसलिए गई थीं क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि तलाशी के दौरान तृणमूल कांग्रेस का संवेदनशील राजनीतिक डेटा एक्सेस किया जा रहा है।
हलफनामे में कहा गया है कि यह डेटा आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से गहराई से जुड़ा हुआ था। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने ईडी अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक पार्टी के डेटा और संबंधित उपकरण/फाइलें लेने की अनुमति मांगी, जिस पर अधिकारियों ने कोई आपत्ति नहीं जताई। डेटा लेने के बाद वह वहां से चली गईं, ताकि तलाशी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
हलफनामे में यह भी दावा किया गया है कि ईडी की पंचनामा रिपोर्ट में दर्ज है कि तलाशी शांतिपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से जारी रही। मुख्यमंत्री ने यह भी तर्क दिया कि कोयला घोटाले में न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही उसके पदाधिकारी आरोपी हैं, इसलिए ईडी को पार्टी के गोपनीय डेटा पर दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।
जवाबी हलफनामे में ईडी पर दुर्भावनापूर्ण मंशा से कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि छापेमारी 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई थी, जब आई-पैक के पास संभावित उम्मीदवारों की सूची सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद थे।
हलफनामे में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वैधानिक सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है और कहा गया है कि ईडी तलाशी की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग पेश नहीं कर सकी, जिससे कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
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